Approximately 887 to 919 pages, depending on the edition.

इस पुस्तक से नोट्स कैसे बनाएं? (Study Strategy)

है। लेखक द्वय ने न केवल घटनाओं का वर्णन किया है, बल्कि उनके पीछे के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक कारणों का सूक्ष्म विश्लेषण भी किया है। जटिल ऐतिहासिक शब्दावलियों को हिंदी में इतनी सरलता से समझाया गया है कि गैर-इतिहास पृष्ठभूमि के छात्र भी इसे आसानी से समझ सकते हैं।

यूरोप में आधुनिक युग की शुरुआत और वैचारिक परिवर्तन।

जिन छात्रों का वैकल्पिक विषय इतिहास है, उनके लिए यह पुस्तक बेस तैयार करने और द्वितीय प्रश्नपत्र के खंड-ख (Section B) को मजबूत करने के लिए एक अनिवार्य ग्रंथ मानी जाती है।

UPSC सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-1 (GS Paper 1) के पाठ्यक्रम में स्पष्ट रूप से लिखा है कि इसमें "18वीं शताब्दी के मध्य से लेकर विश्व के इतिहास की घटनाएं शामिल होंगी"। जैन एवं माथुर की पुस्तक इस पाठ्यक्रम के साथ शत-प्रतिशत न्याय करती है।

चर्च की सत्ता को चुनौती और नए संप्रदायों का उदय।

इस पुस्तक में जिन महत्वपूर्ण कालखंडों पर चर्चा की गई है, वे इस प्रकार हैं:

स्वतंत्रता का संग्राम और इसके वैश्विक प्रभाव।

पुस्तक के मुख्य अध्याय (Contents)

The book is meticulously structured to cover major global shifts. Key themes include:

अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम, फ्रांसीसी क्रांति और औद्योगिक क्रांति जिसने विश्व की आर्थिक संरचना बदल दी। राष्ट्रवाद का उदय:

मध्यकालीन इतिहास में हम रोमन साम्राज्य, इस्लामी साम्राज्य, और मंगोल साम्राज्य जैसे शक्तिशाली साम्राज्यों के बारे में जानते हैं। इन साम्राज्यों ने अपने समय में यूरोप, एशिया, और अफ्रीका में व्यापक प्रभाव डाला।

कारण और परिणाम।

Adhunik Vishwa Itihas (Modern World History) by Dr. Hukam Chand Jain and Dr. Krishna Chandra Mathur is a cornerstone resource for Hindi-medium students preparing for competitive exams like the UPSC, State PCS, and University-level courses. Book Overview Dr. Hukam Chand Jain and Dr. Krishna Chandra Mathur. Time Period Covered: Comprehensive coverage of world history from 1500 to 2000 A.D. Written in clear, accessible Key Topics: Renaissance, Reformation, and the rise of Capitalism.

क्या आप के लिए विश्व इतिहास का विस्तृत पाठ्यक्रम (Syllabus) देखना चाहते हैं?

पुस्तक में आवश्यकतानुसार ऐतिहासिक मानचित्रों (Maps) का समावेश किया गया है, जिससे भौगोलिक सीमाओं और युद्धों के प्रभाव को समझने में आसानी होती है।