Ziyarat E Nahiya In Hindi Free -
: Unlike many other Ziyarats, this text provides a vivid, step-by-step description of the Battle of Karbala
यह ज़ियारत सामान्य ज़ियारत की तरह नहीं है। इसे इमाम महदी (अ.स.) ने अपने "नाइब-ए-खास" (विशेष दूत) के ज़रिए मोमिनों तक पहुँचाया था। Day 13: The Authenticity and Content of Ziyarat Nahiya Aug 1, 2023 YouTube·Thaqlain
इस ज़ियारत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इमाम इसमें कर्बला की जंग और इमाम हुसैन की शहादत का बहुत ही दर्दनाक और विस्तृत वर्णन करते हैं। इसमें इमाम की प्यास, उनके जख्मों और उनके घोड़े (ज़ुलजिनाह) की वापसी का उल्लेख मिलता है。
ज़ियारत-ए-नाहिया क्या है?
The Ziyarat is divided into several major sections that guide the reciter through a spiritual journey: ziyarat e nahiya in hindi
ज़ियारत ए नहिया के दौरान, श्रद्धालु इमाम हुसैन (अस) के मज़ार पर जाते हैं और उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं। यह यात्रा न केवल एक पवित्र यात्रा है, बल्कि यह एक भावनात्मक अनुभव भी है जो श्रद्धालुओं को अपने इमाम के साथ जुड़ने और उनके प्रेम को व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है।
अल्लाहुम्म इननी अना ज़ाइलुक, फअ्ज़ल ज़ियाराती, व अना आरीफु बिलवफा, लिय वलातुक।
इसमें कर्बला के शहीदों के नाम और उन पर ज़ुल्म करने वाले क़ातिलों के नामों का साफ़ ज़िक्र है।
इसके बाद ज़ियारत करने वाला इमाम हुसैन (अ.), उनके बेटे अली अकबर (अ.), उनके भाई हज़रत अब्बास (अ.), और कर्बला में शहीद हुए सभी वफादार साथियों को व्यक्तिगत रूप से सलाम करता है。 : Unlike many other Ziyarats, this text provides
The word "Ziyarat" comes from the Arabic word "ziyara," which means "visit." In this context, it refers to a visit to the shrines of the Ahl al-Bayt (AS), specifically on the Day of Ashura. Ziyarat-e-Nahiya is a ziyarat that expresses one's sorrow, grief, and loyalty to Imam Hussein (AS) and his family. Reciting this ziyarat is believed to bring one closer to the Ahl al-Bayt (AS) and grant them spiritual growth, forgiveness, and blessings.
"Ziarat e Nahiya" नाम से मोबाइल ऐप्स भी उपलब्ध हैं जो अनुवाद और ऑडियो की सुविधा देते हैं .
ज़ियारत के मुख्य विषय (Main Themes)
ज़ियारत-ए-नाहिया (अरबी: زیارة الناحية) एक प्रसिद्ध ज़ियारत (सलाम) है जो हमारे 12वें इमाम, हज़रत इमाम मेहदी (अ.स.) ने हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और करबला के शहीदों को संबोधित करते हुए पढ़ी थी। इस ज़ियारत में इमाम हुसैन (अ.स.) की मसीबतों का बयान इतना मार्मिक है कि इसे पढ़ते हुए हर मोमिन की आंखें भर आती हैं। Reciting this ziyarat is believed to bring one
ज़ियारत में आगे इमाम महदी (अ.) इमाम हुसैन (अ.) को संबोधित करते हुए कहते हैं:
इसे रोज़े के हालत में और रोने की हालत में पढ़ना बहुत अफज़ल माना गया है।
For Hindi speakers, the Ziyarat is often available in two formats: Hindi Transliteration (reading Arabic words in Hindi script) and Hindi Translation (understanding the meaning). 1. Example of Salutation (Hindi Transliteration):
यह शहादत की सच्चाई और उन पर हुए जुल्म की याद दिलाती है, जो अन्याय के खिलाफ खड़े होने का संदेश है।
ज़ियारत ए नाहिया की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका उद्गम स्वयं बारहवें इमाम, इमाम मेहदी (अ.त.फ.श.) से माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि यह ज़ियारत उनके द्वारा पढ़ी गई थी और उनके चार विशेष प्रतिनिधियों (नवाब अरबा) के माध्यम से हम तक पहुंची है। 'ज़ियारत ए नाहिया अल-मुक़द्दसा' शीर्षक का एक अन्य ज़ियारत भी प्रसिद्ध है, जिसका नाम 'ज़ियारत अल-शोहदा' है।