भगवान आदिनाथ ने इसी रायण वृक्ष के नीचे ध्यान लगाया था। यह स्थान अत्यंत प्राचीन और ऊर्जावान माना जाता है। यहाँ चैत्यवंदन करने से साधक को वैराग्य और ध्यान की शक्ति प्राप्त होती है।
पालिताना शत्रुंजय महातीर्थ जैन धर्म का सबसे शाश्वत और पवित्र स्थान है। यहाँ की यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण अंग "5 चैत्यवंदन" (Palitana 5 Chaityavandan) की विधि है। मान्यता है कि इस विधि को पूर्ण श्रद्धा से करने पर जन्म-मरण के बंधनों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
(यहाँ एक नवकार मंत्र गिनें और खमासमण दें) palitana 5 chaityavandan in hindi full
: Climbing the ~3,500 steps is a symbolic journey toward enlightenment.
(praise) for that location. The full lyrics in Hindi/Sanskrit can be found in the reference sources. Tattva Gyan Ritual Significance Spiritual Journey पूंछे श्री आदि जिणंद
यह स्थान इतना पवित्र है कि इसके दर्शन मात्र से दुर्गति (नरक या नीच गति) का नाश हो जाता है। जो यात्री पूरे श्रद्धा और भाव के साथ इस गिरिराज पर चढ़ते हैं, वे संसार रूपी सागर (भवपार) से पार हो जाते हैं।
पूर्व नवाणु ऋषभदेव, ज्यां स्थाप्या प्रभु पाय। 1 ॥ सुखकारी रे कहिए
एक दिन पुंडरीक गणधरु रे लाल, पूंछे श्री आदि जिणंद;सुखकारी रे कहिए, ते भवजल उतरी रे लाल।पांशे परमानंद भव वारी रे लाल...चैत्री पूनम दिन रे लाल, पूजा विविध प्रकार;फल प्रदक्षिणा काउसग्ग रे लाल, लोगस्स थुई नमक्कार।
शत्रुंजय सम तीरथ नहीं, ऋषभ समो नहीं देव,पुंडरीक सम गणधर नहीं, करो निरंतर सेव।पंचम गति पावण तणो, ए जे उत्तम पंथ,सिद्ध कूट को वंदना, नमे सदा जग संत।।
पालीताना 5 चैत्यवंदन का महत्व (Significance)
मार्ग में हुई जीवों की हिंसा के लिए क्षमा याचना।
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